बिके धर्म, जमीर अरु तन, कहीं मूल, राष्ट्र अमूर्त अनंत, बिके धर्म, जमीर अरु तन, कहीं मूल, राष्ट्र अमूर्त अनंत,
राष्ट्र का धर्म राष्ट्र का धर्म
कर प्राण समर्पित देश को, तन इस मिट्टी में मिल जाये। कर प्राण समर्पित देश को, तन इस मिट्टी में मिल जाये।
नारी ही पूजा बाद में सब काम दूजा नारी ही पूजा बाद में सब काम दूजा
दूजा कोई बन जाए श्मशान ऐसी किसी की औकात नहीं। दूजा कोई बन जाए श्मशान ऐसी किसी की औकात नहीं।
बेच देता है ईमान- धर्म, रोटी के लिए इंसान। तड़पता है जीने के लिए, पाने को यह रोटी।। बेच देता है ईमान- धर्म, रोटी के लिए इंसान। तड़पता है जीने के लिए, पाने को यह र...